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भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच मैनचेस्टर में खेला जा रहा वर्ल्ड कप 2019 का सेमीफ़ाइनल मंगलवार को बारिश की वजह से सस्पेंड कर दिया गया. अब मैच का फ़ैसला ‘रिजर्व डे’ यानी बुधवार को होगा.

यदि बुधवार को बारिश नहीं हुई तो भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजे से यह मुक़ाबला शुरू होगा.

नियम के मुताबिक यह मैच वहीं से शुरू होगा जहां तक यह मंगलवार को खेला गया है. यानी न्यूज़ीलैंड पहले अपनी पारी पूरी करेगा फिर भारत बल्लेबाज़ी के लिए उतरेगा.

बारिश से पहले न्यूज़ीलैंड ने 46.1 ओवरों की बल्लेबाज़ी में पांच विकेट के नुकसान पर 211 रन बनाए हैं.

डकवर्थ लुईस से फ़ैसला

अगर बुधवार को भी बारिश की वजह से अगर ओवर घटाए गए और न्यूज़ीलैंड आगे बल्लेबाज़ी नहीं कर पाया तो डकवर्थ लुईस के नियमों के आधार पर भारत का लक्ष्य निर्धारित होगा.

तो डकवर्थ लुईस के नियमों के आधार पर भारत को 20 ओवर मिले तो उसे जीत के लिए 148 रन बनाने होंगे.

25 ओवर्स में यह टारगेट 172 रन, तो 30 ओवर्स में 192, 35 ओवर्स में 209 और 40 ओवर्स में 223 रन होगा.

वहीं 46 ओवरों में भारत को जीत के लिए 237 रन बनाने होंगे.

रिज़र्व

आईसीसी ने दोनों सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल के लिए रिज़र्व डे रखा है.

आईसीसी के नियमों के मुताबिक पहले दिन जहां तक मैच खेला जा चुका है, रिजर्व डे में वहीं से शुरू होगा न कि फिर से खेला जायेगा.

यदि रिज़र्व दिन भी मैच का फ़ैसला नहीं हो सका या बारिश की वजह से खेला ही नहीं जा सका तो फ़ाइनल में वही टीम जायेगी जिसके लीग मैचों में अधिक अंक थे.

इस स्थिति में भारत का पलड़ा भारी है क्योंकि लीग दौर में वह टॉप पर रहा था जबकि न्यूज़ीलैंड चौथे स्थान पर. यानी रिजर्व डे में फ़ैसला नहीं हुआ तो भारत फ़ाइनल में पहुंच जायेगा.

फ़ाइनल में बारिश हुई तो?

यहां यह सोचना लाजमी है कि यदि यही बारिश की यही स्थिति फ़ाइनल में हुई तो क्या होगा क्योंकि वहां से अगले चरण में किसी टीम को नहीं जाना है?

हम आपको बता देना चाहते हैं कि फ़ाइनल मुक़ाबले का बारिश की वजह से ‘रिजर्व डे’ में भी फ़ैसला नहीं हुआ तो दोनों टीमों वर्ल्ड कप की विजेता होंगी, जो अब तक खेले गये 11 टूर्नामेंट में कभी नहीं हुआ है.

अगर मैच टाई हुआ तो क्या होगा?

क्रिकेट के इतिहास में अब तक 37 ऐसे मुक़ाबले हुए हैं जो टाई रहे हैं. टाई का मतलब यह है कि दोनों टीमों ने एक समान स्कोर बनाए.

अब चूंकि यह नॉकआउट चरण है तो यहां से एक टीम को आगे जाना ही होगा. लिहाजा आईसीसी ने इसके लिए फ़ैसला सुपर ओवर से करने का नियम बनाया है.

इसका प्रयोग सीमित ओवरों के क्रिकेट में मैच टाई होने की स्थिति में विजेता का फ़ैसला करने के लिए किया जाता है. पहली बार सुपर ओवर का इस्तेमाल 2008 में किया गया था.

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