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★यह थी घटना:- बात है 28 नवम्बर 1979 की। सिडनी में इंग्लैंड-वेस्टइंडीज के बीच सीरीज का दूसरा टेस्ट खेला जा रहा था। पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने 211 रन बनाए। लेकिन बरसात आने के कारण विंडीज को 47 ओवरों में 199 रनों का लक्ष्य दिया गया। विंडीज को अंतिम ओवर में 10 रनों की जरूरत थी। गेंदबाजी कर रहे थे इयान बॉथम, जिन्होंने अपने जीवनकाल एक भी नो बॉल नही फेंकी। 5 गेंदों में 7 रन आ चुके थे और अंतिम गेंद में 3 रनों की जरूरत थी।इंग्लैंड के कप्तान माइक ब्रियरले ने चौका या छक्का रोकने के लिए टीम के विकेट कीपर सहित सभी 10 खिलाडियों को बाउंड्री पर लगा दिया। ऐसे में विंडीज के बल्लेबाजों के सामने दो ही रास्ते थे या तो दौड़ कर 3 रन लें या फिर छक्का लगाएं। मैच इंग्लैंड के पक्ष में रहा और विंडीज 2 रनों से हार गया।

इसके बाद क्रिकेट प्रशासन में खलबली मच गई और नियम बनाने पर मजबूर होना पड़ा। फील्डिंग के नियम 1980 में बन गए। 1992 के विश्वकप में पहली बार 15 ओवर का पॉवरप्ले लागू हुआ जिसमें सिर्फ 2 खिलाड़ी ही घेरे के बाहर रह सकते थे।

★वर्तमान में यह है नियम:- वर्तमान में 3 पावर प्ले होते है।

पॉवर प्ले-1: यह पॉवर प्ले 1 से 10 ओवरों के बीच होता है, जिसमें 30 गज के घेरे के बाहर केवल 2 खिलाड़ी रह सकते हैं।

पॉवर प्ले-2: यह पॉवर प्ले 11 से 40 ओवरों के बीच लागू होता है जिसमें घेरे के बाहर केवल 4 खिलाड़ी रह सकते हैं।

पॉवर प्ले-3: यह पॉवर प्ले 41 से 50 ओवरों के बीच लागू होता है जिसमें घेरे के बाहर 5 खिलाड़ी रह सकते हैं।

दोस्तों कैसा लगा आपको आर्टिकल? कमेंट करके जरूर बताएं। क्या आपके अनुसार फील्डिंग में कुछ और भी बदलाव होने चाहिए?

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