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तारीख़ 10 जुलाई 2019. इंडिया वर्ल्डकप जीतने से दो कदम दूर था। भारत की क्रिकेट टीम न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ सेमी फ़ाइनल मैच खेल रही थी। मुकाबला न्यूज़ीलैंड के तरफ था। भारत के तरफ से धोनी और जडेजा की जोड़ी मैदान पर थी। पूरे देश की निगाहें इन दोनों खिलाड़ियों के ऊपर टिकी हुई थी क्योंकि इनके बाद कोई बल्लेबाज नही था। तभी एक गेंद पर शॉट मारने के चक्कर में रवींद्र जडेजा आउट हो गए। जडेजा के आउट होने के बाद सारी उम्मीदें महेंद्र सिंह धोनी पर आ टिकी। जब धोनी गेंद को मारने के बाद 2 रन के लिए दौड़े तो फाइन लेग पर खड़े गुप्टिल ने सीधे विकेट पर थ्रो किया।

नतीजा – धोनी विकेट से कुछ इंच की दूरी पर रन आउट हो गए और भारतीय प्रशंसकों का विश्व कप जीतने का सपना कांच के टुकड़ो की तरह बिखर गया। धोनी को रन आउट करने के बाद गुप्टिल बहुत ज्यादा खुश हुए। नतीजतन उनकी टीम फाइनल में पहुंची और इंग्लैंड के सामने अच्छा खेला। लेकिन पहले टाई के बाद, जब सुपरओवर खेला गया, तब इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड के सामने 16 रनो का लक्ष्य रखा।

न्यूजीलैंड की तरफ से गुप्टिल और नीशम बल्लेबाजी करने उतरे। न्यूजीलैंड को अंतिम गेंद पर जीत के लिए दो रन चाहिए थे। आखिरी गेंद पर खेले गए शॉट में गुप्टिल केवल एक रन ले सके और एक और रन लेते हुए रन आउट हो गए। एक बार मैच टाई हो गया था और अधिक चौके लगाने के आधार पर इंग्लैंड विश्व चैंपियन बन गया।

फिलहाल खेल को खेल के नजरिए से ही देखना चाहिए परंतु कुछ लोग गुप्टिल के रन आउट को लेकर ‘कर्मो का फल’ बता रहे हैं तो कुछ लोग कह रहे हैं कि जिस तरह गुप्टिल ने धोनी को रन आउट करके भारत का सपना तोड़ा, ठीक उसी तरह न्यूज़ीलैंड के साथ भी हुआ।

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