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न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में टीम इंडिया की हार के बाद देश में भडक़ा गुस्सा शांत नहीं हो रहा है। सबसे ज्यादा नाराजगी एम.एस.धोनी के बैटिंग नंबर को लेकर है। देश में हर कोई इस बात को लेकर नाराज है कि आखिर क्यों धोनी को सातवें नंबर पर बैटिंग के लिए भेजा गया। सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर व सौरव गांगुली समेत कई दिग्गजों ने इसे लेकर सवाल खड़े किए हैं मगर कोहली व कोच रवि शास्त्री को इस सवाल का जवाब नहीं सूझ रहा है।

फैंस से लेकर पूर्व क्रिकेटर तक हर कोई टीम मैनेजमेंट के इस फैसले से बेहद गुस्से में है। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर सेमीफाइनल में धोनी की बैटिंग पोजिशन को लेकर खासे नाराज हैं। उन्होंने कहा कि धोनी को सातवें नंबर पर भेजने का फैसला बेहद हैरान करने वाला था।

गावस्कर के मुताबिक धोनी को चौथा विकेट गिरने के बाद बैटिंग के लिए आना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जब 24 रनों पर चार विकेट गिर गए थे उस वक्त एक ही मिजाज के दो बल्लेबाजों को आप नहीं भेज सकते हैं। पंत और पंड्या दोनों आक्रामक बल्लेबाज हैं। यहां धोनी को बैटिंग के लिए आना चाहिए था। वो क्रीज पर आकर हर दूसरी गेंद पर रिषभ से बात कर सकते थे। टीम मैनेजमेंट का ये फैसला हैरान कर देने वाला था। यहां सेलेक्शन कमेटी की कोई गलती नहीं थी। यह टीम मैनेजमेंट की चूक थी।

महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भी मैनेजमेंट के इस फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। तेंदुलकर व गांगुली ने कहा कि यह टीम मैनेजमेंट की बड़ी चूक थी। धोनी को निचले क्रम में भेजने का फैसला समझ से परे है और टीम इंडिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ी।

टीम मैनेजमेंट को इस सवाल का जवाब नहीं सूझ रहा है। कोच रवि शास्त्री ने सफाई देते हुए सिर्फ इतना कह सके कि अगर धोनी पहले आउट हो जाते तो टीम चेज करने मे फंस जाती। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में शास्त्री ने कहा कि धोनी को सातवें नंबर पर बैटिंग के लिए भेजने का फैसला आसान फैसला था।

शास्त्री ने कहा कि अगर धोनी पहले बैटिंग के लिए आते और वो जल्दी आउट हो जाते तो फिर सारा चेज ही बिगड़ जाता। हमें उनके अनुभव की बाद में जरूरत थी। वो दुनिया के सबसे बड़े फिनिशनर हैं और अगर हम उनका इस्तेमाल ऐसे नहीं करते तो फिर ये न्याय नहीं होता।

कोहली ने कहा कि शुरुआती कुछ मैचों के बाद यह प्लान किया गया था कि धोनी निचले ऑर्डर के बल्लेबाजों के साथ खेलेंगे। उन्होंने जडेजा के साथ अच्छी बल्लेबाजी की। टीम में सही बैलेंस होने की जरूरत है। अगर एक खिलाड़ी हिट कर रहा है, तो दूसरे को विकेट बचा कर खेलने की जरूरत होती है।

दोस्तों, टीम मैनेजमेंट के इस फैसले पर आपकी क्या राय है? कोहली व शास्त्री ने सही किया या गलत?

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