जब ZIM के 250 रनों के जवाब में भारत का स्कोर था 91/5, फिर हुआ चमत्कार, शान से जीता था भारत

हम इस लेख में एक ऐसे मैच के बारे में बात करेंगे जिसमें दो युवा क्रिकेटरों ने भारतीय टीम को जीत दिलाई थी। 2005 को भारत, न्यूजीलैंड और जिम्बाब्वे के बीच त्रिकोणीय श्रृंखला खेली गई थी। 5 सितंबर को भारत और जिम्बाब्वे के बीच छठवां मैच हरारे में खेला जा रहा था।

इस मैच में जिम्बाब्वे ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवर में सभी विकेट खोकर 250 रनों का स्कोर खड़ा किया और भारत को 251 रनों का लक्ष्य दिया। भारत के लिए अजीत अगरकर ने सबसे अधिक 3, आरपी सिंह ने 2, जय प्रकाश यादव, हरभजन सिंह और मुरली कार्तिक ने 1-1 विकेट चटकाए थे।

इस स्कोर को देखकर लग रहा था कि भारतीय टीम इस मुकाबले को आसानी से हासिल कर लेगी। लेकिन जिम्बाब्वे के गेंदबाजों ने खतरनाक गेंदबाजी करते हुए भारतीय बल्लेबाजों को क्रीज पर टिकने नहीं दिया। 36 रन के स्कोर पर भारत के 4 विकेट आउट हो चुके थे। जिसमें वीरेंद्र सहवाग (12) कप्तान सौरव गांगुली (2), मोहम्मद कैफ (8) राहुल द्रविड़ (6) रन बनाकर पैवेलियन लौट गए थे।

हालांकि पांचवें विकेट के लिए युवराज सिंह और वेणुगोपाल राव के बीच 55 रनों की साझेदारी हुई लेकिन जब भारत का स्कोर 91 रन था। तब वेणुगोपाल राव भी 27 रन के व्यक्तिगत स्कोर पर आउट हो गए थे। अब लगने लगा था भारतीय टीम शायद ही इस मैच को जीत पाएगी।

फिर हुआ चमत्कार

अब भारतीय टीम के युवराज सिंह और महेंद्र सिंह धोनी के रूप में दो युवा क्रिकेटर क्रीज पर मौजूद थे और दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया था। युवराज सिंह 124 गेंदों पर 12 चौकों तथा 1 छक्के की मदद से 120 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली थी।

वहीं महेंद्र सिंह धोनी ने 63 गेंदों पर 67 रनों की तूफानी पारी खेली थी। जिसमें 1 चौका तथा 3 शानदार छक्के शामिल थे। धोनी और युवराज के बीच छठवें विकेट के लिए 158 रनों की साझेदारी हुई थी और भारतीय टीम इस मैच को 4 विकेट से अपने नाम कर ली थी।

इन्हें मिला था मैन ऑफ द मैच का खिताब

युवराज सिंह को मैन ऑफ द मैच के खिताब से नवाजा गया था। उसी वक्त से यह आभास हो गया था कि युवराज सिंह और महेंद्र सिंह धोनी आने वाले वक्त में महान और मैच विनर खिलाड़ी बनेंगे।