करिश्‍मा क्रिकेट का: एक गेंदबाज ने एक ही दिन में दो बार ले डाले विरोधी टीम के सभी 10 विकेट

ve walker took 10 wickets two time in same day in six year gap on this day

क्रिकेट को तो वैसे भी अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है. सच भी है. तभी तो कभी भी कोई भी टीम हारी बाजी जीत जाती है जबकि कोई टीम जीता हुआ मुकाबला गंवा देती है. वैसे एक बात और है जो इस खेल को खास बनाती है. वो कोई बल्‍लेबाज, गेंदबाज या फील्‍डर नहीं है, बल्कि संयोग है. जिंदगी की तरह क्रिकेट के खेल में भी संयोग होते हैं. हालांकि ये संयोग ऐसे होते हैं जिन पर आश्‍चर्य ज्‍यादा नहीं होता, लेकिन जिस घटना का जिक्र हम करने जा रहे हैं वो क्रिकेट की दुनिया का एक ऐसा संयोग है जो आम नहीं है और इस पर बिना हैरान हुए रहा ही नहीं जा सकता. बेशक अगर आप इसके बारे में जानेंगे तो आप भी इस खिलाड़ी और इस संयोग के मुरीद हुए बिना नहीं रह सकेंगे.

दरअसल, हम बात कर रहे हैं इंग्‍लैंड (England) के एक खिलाड़ी की. इसका नाम वी वॉकर (VE Walker) है. और हम इसके बारे में बात करने पर मजबूर इसलिए हुए हैं क्‍योंकि इस खिलाड़ी ने आज ही के दिन यानी 22 जुलाई को एक नहीं बल्कि दो करिश्‍मों को अंजाम दिया था. वॉकर दुनिया के पहले और इकलौते ऐसे गेंदबाज हैं जिन्‍होंने छह साल के अंतराल में एक ही दिन दो अलग-अलग टीमों के खिलाफ एक पारी में दो बार सभी दस विकेट हासिल किए. सबसे पहले वॉकर ने 22 जुलाई 1859 को इंग्‍लैंड की ओर से खेलते हुए सरे के खिलाफ ये कारनामा अंजाम दिया. तब उन्‍होंने 74 रन देकर 10 विकेट हासिल किए. यानी पूरी की पूरी पारी को अकेले ही निपटा दिया.

145 मैचों में चटकाए 334 विकेट

इसके छह साल बाद वी वॉकर ने 1865 में मिडलसेक्‍स के लिए खेलते हुए लैंकाशर की पूरी पारी को समेट दिया. इस बार उन्‍होंने 104 रन देकर सभी दस विकेट अपने नाम किए. मजे की बात ये है कि इस बार भी दिन आज ही का यानी 22 जुलाई का ही था. वॉकर को कभी इंग्‍लैंड की राष्‍ट्रीय टीम के लिए खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन उन्‍होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खूब धमाल मचाया. वॉकर ने अपने करियर में कुल 145 प्रथम श्रेणी मुकाबले खेले. इनमें उन्‍होंने 334 बल्‍लेबाजों का शिकार किया. इस दौरान पारी में 74 रन देकर 10 विकेट लेने का प्रदर्शन सर्वश्रेष्‍ठ रहा. इसके अलावा उन्‍होंने 27 बार पारी में पांच या उससे अधिक विकेट हासिल किए. जबकि 8 बार मैच में 10 या ज्‍यादा बल्‍लेबाजों के विकेट अपने खाते में डाले. प्रथम श्रेणी करियर में उन्‍होंने 17.26 की औसत से 1 शतक और 12 अर्धशतकों की मदद से 3384 रन भी बनाए.

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